Thursday, March 14, 2013

ARTI SHIV JI KI



ॐ जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा 
ब्रह्म विष्णु सदां शिव अर्द्धांगी धारा || 

एकानन चतुरानन पंचानन राजै
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजै || ॐ हर हर महादेव 

दो भुज चारू चतुर्भुज दश भुजते सोहे
तीनो रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे || 

अक्षयमाला बन माला रुंड माला धारी
त्रिपुरारी असुरारी शाशिमाला धारी || ॐ हर हर महादेव 

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे 
सनकादिक गरुडादिक भूतादिक संगे || 

कर के मध्य कमंडल चक्रत्रिशुल धरता
सुखकर्ता दुखहर्ता जग-पालन करता || 

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका 
प्राणावकशर में शोभित तीनो एका || 

त्रिगुण स्वामी की आरती जो कोई नर गावे 
कहत शिवानन्द स्वामी मन वांछित फल पावे || ॐ हर हर महादेव 

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